राजद के दिग्गज नेताओं के सियासी वारिसों पर जदयू की नजर, बिहार में इस फार्मूले पर काम कर रही नीतीश की पार्टी

बिहार के दो क्षेत्रीय दलों के बीच वर्चस्व की लड़ाई लगातार जारी रहती है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू और लालू यादव की पार्टी राजद समय-समय पर आमने सामने रहती हैं। फिलहाल दोनों दलों की ओर से भविष्य को देखते हुए सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी गई है। राजद जहां एमवाई समीकरण से बाहर निकलकर नए-नए वर्गों को जोड़ने में जुट गया है तो वहीं नीतीश कुमार की पार्टी राजद में लगातार सेंधमारी कर रही है। जदयू का निशाना वर्तमान में राजद के दिग्गज नेताओं के सियासी वारिसों पर है। माना जा रहा है कि राजद के दिग्गज नेताओं के सियासी वारिसों को पार्टी में शामिल कराकर जदयू आने वाले भविष्य में अपने सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 
 

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इसी कड़ी में मंगलवार को लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी और राजद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के परिवार में बड़ी टूट पड़ी। दरअसल, जगदानंद सिंह के इंजीनियर बेटे अजीत सिंह जदयू में शामिल हो गए। जदयू में शामिल होने के साथ ही अजीत सिंह ने राजद और लालू परिवार पर कई बड़े आरोप भी लगा दिए। अजीत ने इस अवसर पर आरोप लगाया कि राजद में पार्टी कार्यकर्ताओं को आए दिन अपमानित किया जाता है, यही वजह है कि उस पार्टी में उनके जैसे लोग जदयू की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजद का शीर्ष नेतृत्व कार्यकर्ताओं को धन संग्रह एजेंट के रूप में मानता है। अजीत एक प्रभावशाली राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। अजीत ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद के राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जा रहे उनके छोटे पुत्र तेजस्वी यादव के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अब उच्च जातियों का समर्थन होने के कारण राजद ‘‘ए टू जेड’’ की पार्टी बन गयी है।
 

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इन सबके बीच राजद विधायक विभा देवी और पूर्व राजद विधायक तथा लालू यादव के बेहद करीबी राजबल्लभ यादव के भतीजे ने भी नीतीश कुमार से मुलाकात की है। राजबल्लभ यादव के भतीजे अशोक यादव निर्दलीय एमएनसी बने हैं। माना जा रहा है कि वह जदयू में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा कुछ होता है तो राजद के लिए इसे झटका ही माना जाएगा। इसके अलावा राजद के वरिष्ठ नेता रहे रघुवंश प्रसाद सिंह का परिवार भी समय-समय पर नीतीश कुमार की तारीफ करता रहता है। हालांकि जगदानंद सिंह के बेटे अजीत का राजनीतिक दबदबा ज्यादा नहीं है। लेकिन जदयू में उनके शामिल होने का महत्व इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद इस मौके पर इस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा मौजूद रहे।

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