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सहयोगी दलों के लिए सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय, सपा के निशान पर चुनाव लड़ेंगे शिवपाल ! अखिलेश ने तैयार की पूरी रणनीति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने सहयोगी दलों के लिए सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तैयार कर लिया है। सपा प्रमुख ने बुधवार को सहयोगी दलों के साथ बैठक की। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि सपा अपने सहयोगियों के लिए 50 से 60 सीटें छोड़ेगी। इनमें से कुछ उम्मीदवार सपा के चुनाव चिह्न के माध्यम से मैदान पर उतरेंगे। हालांकि, अभी तक इसका औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है लेकिन माना जा रहा है कि सपा एकाद दिनों के भीतर इसका ऐलान करेगी।

2017 में फेल हुई थी गठबंधन की राजनीति

साल 2022 के चुनाव को लेकर अखिलेश यादव काफी ज्यादा आशान्वित नजर आ रहे हैं। हालांकि उन्होंने साल 2017 का विधानसभा चुनाव नहीं भूलना चाहिए। इस चुनाव में अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में बुआ और बबुआ साथ आ गए थे और फिर भी लोगों के बीच में अपनी पहुंच नहीं बना पाए। ऐसे में अखिलेश यादव ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वो इस बार छोटे-छोटे दलों को साथ लेकर आगे बढेंगे।

सीट शेयरिंग का फॉर्मुला तय

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव ने बुधवार को हुई बैठक में यह तय किया कि 50 से 60 सीटें सहयोगी दलों के खाते में जाएंगी। इसके साथ ही इनमें से कुछ उम्मीदवार सपा के चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे। सूत्रों ने बताया कि सपा ने ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा को 8, चाचा शिवपाल यादव की प्रसपा को 6, संजय चौहान की जनवादी पार्टी और केशव देव मौर्य के महान दल को 3-3 सीटें दे सकती है।

इसके अलावा अखिलेश यादव राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी को 25 से 30 सीटें दे सकते हैं। माना जा रहा है कि एनसीपी और टीएमसी के लिए भी पार्टी 1-1 सीट छोड़ सकती है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक शिवपाल यादव की पार्टी प्रसपा के उम्मीदवार सपा के चिह्न पर भी मैदान पर उतरेंगे। सपा प्रमुख ने सहयोगी दलों के साथ की एक तस्वीर साझा की। इसके साथ उन्होंने ट्वीट में लिखा कि सपा के सभी सहयोगी दलों के शीर्ष नेतृत्व के साथ, आज हुई उत्तर प्रदेश के विकास और भविष्य की बात…

 

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