आंखों पर पट्टी बांध कैनवास पर भगवान गणेश का चित्र बना देते है मूर्तिकार विजय

वाराणसी। गणपति बप्पा मोरया आज से यह जयघोष 10 दिनों तक पूरे भारत में गूंजेगा। माघ कृष्ण चतुर्दशी में विघ्नहर्ता भगवान गणपति का अवतरण हुआ था इसी कारण से चतुर्थी को भगवान गणेश की जय कार मुंबई से लेकर पूरे देश भर में होती है और पूरे विधि विधान से पूजन अर्चन का विधान भी प्रसिद्ध है। मंदिरों और अध्यात्म की नगरी वाराणसी यानि काशी में बहुत ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है यह गणेश उत्सव पूरे देश में 10 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। सभी स्थानों घरों मंदिरों में भगवान गणपति की प्रतिमा विराजमान होती है। भक्ति और आस्था हर इंसान के अंदर किसी ना किसी भाव में निहित होती है ऐसे में कला भी साधना का प्रमुख तत्वों में से एक है।

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वैसे तो काशी धर्म, संतो, बड़े-बड़े साधकों के लिए बहुत प्रसिद्ध है यहां के संत साधक अपनी आस्था और धर्म में विश्वास करने की वजह से ही हर जगह बहुत प्रसिद्ध है। यहां गणेश उत्सव की वजह से हर जगह पूजा पाठ एवं खुशियां मनाई जा रही है तो वहीं काशी की एक ऐसे कलाकार हैं जो बनारस के अस्सी क्षेत्र में रहने वाले हैं जो भगवान गणेश के भक्त होने के साथ-साथ एक बहुत ही अच्छी कलाकार व प्रसिद्ध चित्रकार हैं। जिनका नाम विजय है जो आंखें बंद करके ही भगवान गणेश के चित्र को कागज पर बना देते हैं। मूर्तिकार विजय केवल मन से ही श्री गणेश के मंत्रों का उच्चारण करते हैं और ध्यान लगाते हुए मात्र 2 से 3 मिनट में ही गणेश जी के चित्र को कैनवास पर उतार देते हैं। अपनी इस अद्भुत कला के लिए इनका नाम लिम्का बुक में भी दर्ज हो चुका है इतना ही नहीं इन की पेंटिंग देश के कई हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनी में भी लग चुकी है। विजय गणेश उत्सव के पहले दिन ही गणपति के 108 पेंटिंग्स बनाकर गणपति का पूजन अर्चन प्रारंभ करते हैं।

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विजय से बातचीत में  उन्होंने बताया कि उन्होंने बहुत सारे मंदिरों में जाकर पेंटिंग भी बनाई है और बनारस में विराजित 56 विनायक में भी पेंटिंग बना रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि उनके यहां पेंटिंग बनाने एवं मूर्ति बनाने का कार्य कई पीढ़ियों से चलता आ रहा है। विजय ने बताया कि वह 10 सालों से आंखें बंद करके बप्पा का चित्र बनाते हैं वह कहते हैं बप्पा उनकी आंखों व हृदय में बसे हैं और जब तक गणपति की कृपा उन पर बनी रहेगी तब तक वह चित्र बनाते रहेंगे। उन्होंने बताया कि जैसे लोग मंत्रों का उच्चारण करते हैं वैसे ही मैं 108 पेंटिंग आंखें बंद करके बनाकर गणपति का स्मरण करता हूं। इसके लिए उन्हें बहुत सारे सम्मानित अवॉर्ड भी मिले हैं। इसके साथ ही उन्हें काशी रत्न से भी नवाजा गया है और 56 घंटे तक बिना रुके पेंटिंग बनाने के लिए विजय का नाम लिम्का बुक में भी दर्ज हुआ है। अंत में उन्होंने बातचीत में कहा मैं हमेशा गणपति की आराधना करता रहूंगा जब तक मेरी सांसे चलेगी।

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