अब नहीं कर पाएंगे गन्ना माफिया रकबे में गड़बड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया में बदलाव कर गन्ना विभाग ने उठाया ठोस कदम

मेरठ, गन्ना विभाग ने वेबसाइट पर आनलाइन घोषणा-पत्र भरते समय जटिल प्रक्रिया को सरलीकृत करने एवं गन्ना किसानों की सुविधाओं के दृष्टिगत विभाग द्वारा राजस्व भूमि के प्रमाण के रूप में खतौनी अपलोड़ करने की व्यवस्था को समाप्त किया गया है। इसके बाद सुविधा का दुरूपयोग करते हुए यदि किसी गन्ना माफियाओं द्वारा गड़बडी करने के उद्देश्य से अपना रकबा भरते समय रकबे में परिवर्तन कर दिया जाता है, तो इसे विभाग द्वारा आसानी से चिन्हित कर लिया जाएगा।
गन्ना विभाग के अधिकारी ने बताया कि गन्ना विभाग द्वारा किसानों के रकबे का मिलान राजस्व विभाग द्वारा प्रदत्त भूलेख एपीआइ से अनिवार्य रूप से किया जाएगा। यदि किसी भी किसान द्वारा जानबूझकर अपने रकबे को गलत दर्शाया गया तो गलत डाटा भरने पर संबंधित किसान का सट्टा लाक करते हुए गन्ना मूल्य भुगतान भी रोक दिया जायेगा एवं सदस्यता खारिज करने की कार्रवाई भी कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सट्टा लाक होने पर किसी भी प्रकार की पर्ची निर्गत नहीं हो पाएगी।
गन्ना आयुक्त ने बताया कि गन्ना विभाग के पास गन्ना किसानों का गत पांच वर्ष का महत्वपूर्ण डाटा उपलब्ध है। विभागीय सोफ्टवेयर में ऐसी व्यवस्था भी उपलब्ध है कि जिस भी किसान ने अपने रकबे में परिवर्तन किया है वह ईआरपी सोफ्टवेयर के माध्यम से स्वतः चिन्हित हो जाएंगे। गन्ना आयुक्त ने किसानों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि खतौनी अपलोड करने की अनिवार्यता को समाप्त करना विभाग द्वारा गन्ना किसान हित में उठाया हुआ सहरानीय कदम है। इसमें कोई भी अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, फिर भी यदि शिकायत पाई गई तो सघन जांच दल द्वारा मौके पर भौतिक सत्यापन कराने के उपरांत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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