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पुलवामा हमले का एकमात्र जिंदा बचा आतंकी भी मारा गया ! साल के पहले दिन क्यों नजरबंद किये गये उमर और महबूबा ?

पुलवामा हमले का एकमात्र जिंदा बचा आतंकी भी मारा गया ! साल के पहले दिन क्यों नजरबंद किये गये उमर और महबूबा ?

जम्मू-कश्मीर पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी है क्योंकि माना जा रहा है कि 2019 के पुलवामा हमले में शामिल एकमात्र बचा हुआ आतंकवादी मुठभेड़ में मारा गया है। हालांकि अभी इस आतंकवादी की डीएनए जांच कराई जायेगी। इस बारे में कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने कहा है कि अनंतनाग मुठभेड़ में मारे गए तीन आतंकवादियों में से एक की डीएनए जांच कराई जाएगी क्योंकि उसकी तस्वीर 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले में शामिल अंतिम जीवित बचे आतंकवादी की तस्वीर से मिलती-जुलती है। उल्लेखनीय है कि पुलवामा आतंकवादी हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हो गए थे। आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि मारे गए आतंकवादी की तस्वीर जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष कमांडर समीर डार से मेल खाती है। पुलिस महानिरीक्षक ने ट्विटर पर कहा, “अनंतनाग मुठभेड़ में 30 दिसंबर को मारे गए आतंकवादियों में से एक की तस्वीर जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष कमांडर समीर डार से मेल खाती है जो लेथपुरा, पुलवामा आतंकवादी हमले में शामिल अंतिम जीवित आतंकवादी था। डीएनए जांच कराई जाएगी।”

उल्लेखनीय है कि पुलिस ने कहा था कि बृहस्पतिवार को दक्षिण कश्मीर जिले के नौगाम दूरू इलाके में हुई मुठभेड़ में जैश के तीन आतंकवादी मारे गए और मुठभेड़ स्थल से उनके शव बरामद कर लिए गए। उस समय पुलिस ने मारे गए आतंकवादियों की पहचान सुल्तान उर्फ रईस उर्फ माविया (एक विदेशी आतंकवादी), दुदवांगन कापरान निवासी निसार अहमद खांडे और नाथीपुरा दूरू निवासी अल्ताफ अहमद शाह के रूप में की थी। पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि अल्ताफ अहमद शाह और सुल्तान एक अन्य आतंकवादी सुहैल राठर के साथ जेवान, श्रीनगर में एक हमले में शामिल थे जिसमें तीन पुलिसकर्मी मारे गए थे और 11 अन्य घायल हो गए थे। सुहैल राठर शनिवार को पंटाह चौक पर एक अलग मुठभेड़ में मारा गया।

कई नेता नजरबंद  

दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) द्वारा मार्च निकाले जाने से पहले तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित कई नेताओं को नजरबंद कर दिया गया जिसके विरोध में इन पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के पुत्र एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने टि्वटर पर कहा, “सुप्रभात और 2022 का स्वागत। उसी जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ एक नए साल की शुरुआत जो अवैध रूप से लोगों को उनके घरों में बंद कर रही है और प्रशासन सामान्य लोकतांत्रिक गतिविधि से इतना डरा हुआ है।” मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एवं गठबंधन के प्रवक्ता एमवाई तारिगामी ने कहा कि यह दुखद है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन “इतना डरा हुआ है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे पा रहा है।” पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को भी नजरबंद किया गया है। उन्होंने कहा, “मेरे घर के बाहर भी एक ट्रक खड़ा है।” हम आपको बता दें कि गुपकार गठबंधन ने जम्मू संभाग में विधानसभा की छह और कश्मीर में एक सीट बढ़ाने के परिसीमन आयोग के प्रस्ताव के खिलाफ शनिवार को श्रीनगर में प्रदर्शन करने की बात कही थी। जिसके बाद इन नेताओं को नजरबंद किया गया है।

लोगों के बीच हर्ष का माहौल   उधर, तीन पूर्व मुख्यमंत्री भले निराशा जता रहे हों लेकिन कश्मीर की जनता बड़ी आशावान दिख रही है। कश्मीरियों ने नये साल का खुशी खुशी स्वागत किया और प्रभासाक्षी संवाददाता से बातचीत में उम्मीद जताई कि यह साल सबके लिए खुशियां लेकर आयेगा और कोरोना महामारी से मुक्ति दिलायेगा।

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