ऋण घोटाला मामला: केरल विधानसभा में विपक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप, बहिर्गमन किया

तिरुवनंतपुरम। केरल में माकपा नीत एलडीएफ सरकार को करोड़ों रुपये के एक ऋण घोटाले के मामले में विधानसभा में विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ा। यह मामला पार्टी के नियंत्रण वाले एक सहकारी बैंक से जुड़ा है और विपक्ष का आरोप है कि इस धोखाधड़ी के बारे में स्पष्ट जानकारी होने के बाद भी पार्टी ने इसे गुप्त रखा। शून्य काल के दौरान विपक्ष के नेता सदन की कार्यवाही को स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराना चाहते थे। विपक्षी नेता इसे दक्षिणी राज्य के इतिहास की ‘सबसे बड़ी बैक डकैती’ बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला 2018 में ही प्रकाश में आ गया था लेकिन त्रिशूर जिले के इरिंजालाकुडा में कारवन्नूर सहकारी बैंक की संचालन परिषद को बृहस्पतिवार को बर्खास्त किया गया। विपक्षी नेताओं ने अपने आरोपों को सही ठहराते हुए कहा कि सत्तारूढ़ वामपंथी पार्टी इस धोखाधड़ी को गुप्त रखने का निर्णय ले चुकी थी।

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विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कहा, ‘‘ इन तीन वर्षों में आप क्या कर रहे थे?’’ विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के लिए अनुमति देने से इनकार करने के अध्यक्ष एम बी राजेश के कदम का विरोध करते हुए विपक्ष के नेता सदन से बहिर्गमन कर गए और उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि इस धोखाधड़ी के सामने तो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित बैंक डकैती भी कुछ नहीं है। हालांकि सहकारिता मंत्री वी एन वासवन ने अपने जवाब में आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए इस धोखाधड़ी में कथित तौर पर शामिल सात बैंक कर्मचारियों को निलंबित कर दिया।इस संबंध में पहली शिकायत 16 जनवरी, 2019 को दर्ज हुई थी, जिसके एक सप्ताह के भीतर ही पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था।

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वहीं बैंक की संचालन परिषद को बर्खास्त करने में विलंब के आरोपों के बारे में मंत्री ने कहा कि ऐसा करने से पहले जांच समेत कुछ अनिवार्य प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है। मंत्री ने कहा कि बैंक में करीब 104 करोड़ रुपये की अनियमितता पाई गई है। उन्होंने कहा, ‘‘अपराध शाखा की जांच में प्रगति हो रही है। सहकारी विभाग अलग से जांच कर रहा है।

 

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