अदालतों को उनके कार्य की कोई प्रशंसा नहीं मिलती: अदालत

अदालतों को उनके कार्य की कोई प्रशंसा नहीं मिलती: अदालत

नयी दिल्ली|  दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में पटरियों पर अवैध रूप से बैठने और बिक्री गतिविधियों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘अदालतें जो काम करती हैं उससे उन्हें कोई प्रशंसा नहीं मिलती, बल्कि उसे नाराजगी ही मिलती है।’’

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब ‘नयी दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन’ का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील इस बात पर जोर दे रहे थे कि शीर्ष अदालत के पहले के फैसलों में भी कहा गया है कि विक्रेताओं के पास पूर्ण अधिकार नहीं है और उन्हें दूसरों के अधिकारों के साथ संतुलित होना चाहिए।

वकील ‘स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट’ की वैधता को चुनौती देने वाली अपनी याचिका के समर्थन में विभिन्न न्यायिक निर्णयों का उल्लेख कर रहे थे।

पीठ की टिप्पणी पर एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव रल्ली ने कहा, ‘‘अगर अदालत को ऐसा महसूस कराया जाता है तो हम किस ओर जा रहे हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘चाहे छोटे से लेकर बड़ा समुदाय हो, जब भी कुछ भी अनुचित होता है, तो हर कोई आपके सामने आता है…।’’

अदालत ने मामले को 8 दिसंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। ‘स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट’ की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं अदालत के समक्ष विचाराधीन हैं।

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