लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह को राज्यपाल बना भाजपा सरकार ने चला बड़ा दांव, एक तीर से साधे कई निशाने

हाल में ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त गुरमीत सिंह को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया। गुरमीत सिंह की नियुक्ति पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के इस्तीफे के बाद हुई। भले ही राज्यपाल का पद सियासत से दूर होता है लेकिन राज्यपालों की नियुक्तियां राजनीति में बड़ा महत्व रखती हैं। एक बार फिर गुरमीत सिंह को राज्यपाल बनाए जाने के बाद इसके सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं। गुरमीत सिंह की नियुक्ति को अगले साल होने जा रहे उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव को जोड़ा जा रहा है।

उत्तराखंड में होगा या फायदा

लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त गुरमीत सिंह की उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति भाजपा को अगले चुनाव में कई मायनों में सियासी फायदा भी पहुंचा सकती है। दरअसल, कहा जाता है कि उत्तराखंड में ज्यादातर परिवारों में से कोई ना कोई सदस्य सेना में होता है। अगर किसी परिवार का सदस्य सीधे तौर पर सेना में ना हो तो उसका सगा-संबंधी तो जरूर होता है। वहां बड़ी तादाद में पूर्व सैनिकों की संख्या है। ऐसे में पार्टी गुरमीत सिंह की नियुक्ति कर सैनिकों को साधने की कोशिश में है। उत्तराखंड में सिखों की आबादी भी अच्छी खासी है खास करके उधम सिंह नगर में।

कोठियाल का काट

इसके साथ ही गुरमीत सिंह की राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति इसलिए भी अहम हो जा रही है क्योंकि उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ने वहां अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार रिटायर कर्नल अजय कोठियाल को बनाया है। अजय कोठियाल कीर्ति चक्र से सम्मानित हैं। इसके अलावा उनकी छवि भी साफ है। उन्हें बहादुरी की मिसाल भी कहा जाता है। कोठियाल 2013 में विनाशकारी हिमालयन सुनामी के दौरान भी जमीन पर रहकर काम करते रहे। आने वाले विधानसभा चुनाव को आम आदमी पार्टी देशभक्त बनाम नेता का मुद्दा बना रही है। ऐसे में कोठियाल के काट के तौर पर गुरमीत सिंह को राज्यपाल बनाया गया है।

पंजाब में फायदा

गुरमीत सिंह सिख हैं। वह पंजाब के रहने वाले हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति पंजाब में भाजपा को फायदा पहुंचा सकती है। पंजाब में भाजपा को झटका इसलिए भी लग सकता है क्योंकि वहां किसान आंदोलन चल रहा है। ऐसे में गुरमीत सिंह के जरिए भाजपा सिख समुदायों को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि पार्टी आप लोगों को साथ लेकर चलती है।

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