महाराष्ट्र के नांदेड में बोले अमित शाह, PM मोदी ने सबसे पहले जलवायु परिवर्तन पर दिया था ध्यान

मुंबई। महाराष्ट्र के नांदेड में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे ‘अखिल भारतीय वृक्षरोपण अभियान-2021’ के कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज ही के दिन हैदराबाद के निजाम के जुर्मी शासन से तेलंगाना का क्षेत्र आजाद हुआ था। भारत के पहले गृह मंत्री लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल ने बड़ी दृढ़ता, वीरता और रणनीतिक कुशलता के साथ उनके नापाक इरादे को नाकामयाब किया था और पूरे हिस्से को अखंड भारत का हिस्सा बनाया था। 

उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 के हम आजाद हो गए थे लेकिन यह क्षेत्र 13 महीने बाद आजाद हुआ था। इस मायने में इस क्षेत्र का आजादी दिवस आज ही है। ऐसे में मैं सभी मराठवाड़ा, विदर्भ क्षेत्र और तेलंगाना के लोगों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देना चाहता हूं। इस क्षेत्र की आजादी के लिए स्वामी रामानंद तीर्थ, दिगंबर राव बिंदु, बेगू सिंह चौहान ऐसे बहुत से दिग्गजों ने अपनी जान न्योछावर किया था।

गृह मंत्री ने कहा कि एक तरफ निजाम की क्रूर फौजे थी, प्रजाकार थे, इन सबके साथ लड़ाई लड़कर आज यह हिस्सा भारत के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसे में उनका सर्वोच्च बलिदान हम नहीं भूल पाएंगे।

PM मोदी का जन्मदिन

इस बीच गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मोदी जी आजादी के बाद देश में ऐसे पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने जलवायु परिवर्तन पर ध्यान दिया था और दुनिया में भी उस वक्त बहुत कम लोगों ने इस दिशा की तरफ ध्यान दिया था। उन्होंने जलवायु परिवर्तन विभाग को सरकार के भीतर प्रस्तावित करने का काम किया था। 

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन को संभालने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था की शुरुआत मोदी जी ने की थी। आज उन्हीं के जन्मदिन के अवसर पर आज हम 1 करोड़ पेड़ लगा रहे हैं।

हर मोर्चे पर CRPF ने निभाई जिम्मेदारी

इसी बीच उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने जवानों के बलिदान से देश सुरक्षित है। सीआरपीएफ ने ही सबसे पहले दुश्मनों को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने हर मोर्चे पर अपनी जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के 2000 से ज्यादा जवानों ने जो बलिदान दिया है इसी के कारण हमारा देश सुरक्षित है और उसकी आंतरिक सुरक्षा मजबूत है। हर मोर्चे पर दुश्मनों को सीआरपीएफ ने चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि पहले देश के सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, फिर आतंरिक सुरक्षा और फिर दंगे रोकने की जिम्मेदारी आई। इसके बाद वामपंथी उग्रवादियों के सामने लड़ने की जिम्मेदारी आई इत्यादि में उन्होंने हर अपेक्षाओं में खरे उतरे हैं। 

उन्होंने कहा कि हम सीआरपीएफ के बिना तो आंतरिक सुरक्षा की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। हमें उनके त्याग, बलिदान और समर्पण पर गर्व है।

यहां सुनें पूरा संबोधन:-

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