हिंदी दिवस पर प्रभासाक्षी के वेबिनार में बोले IIMC के महानिदेशक, 2030 तक बढ़ जाएगा डिजिटल मीडिया का उपयोग

वर्तमान दौर में हिंदी का डंका देश-दुनिया में बज रहा है। हिंदी पर गर्व अनुभूति करने की बात इसलिए भी है कि हम ऐसी भाषा में पैदा हुए हैं जिसके पास सबसे बड़ा शब्द संसार है। जिसके पास रचनाकारों की एक महान परंपरा है। 14 सितबंर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है और हिंदी दिवस के अवसर पर प्रभासाक्षी.कॉम की तरफ से वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ में संपादक नीरज कुमार दुबे ने प्रभासाक्षी परिवार की तरफ से आभार व्यक्त किया। आज के डिजीटल युग में हिंदी भाषा का महत्व क्या है। हमारी प्यारी भाषा हिंदी को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग किया जा सकता है। जिसके बाद आईआईएमसी के महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी से वक्तवय देने के लिए आमंत्रित किया। संजय द्विवेदी जी ने कहा कि सूचना के तमाम माध्यमों में इंटरनेट सबसे ऊपर है। चीन और अमेरिका के बाद भारत में सबसे अधिक इंटरनेट यूजर मौजूद हैं। 3 मिलियन वेब पेज रोज सर्च किए जाते हैं। डिजिटल माध्यम से कई नए पत्रकार उभरकर आए हैं। रिजनल कैटेगरी के कंटेट के ज्यादा इस्तेमाल में वृद्धि दर्ज की गई। इंडिया डिजिटल फ्यूचर रिपोर्ट के अमुसार 2030 तक डिजिटल मीडिया का उपयोग काफी बढ़ जाएगा।

भाषा का अशुद्धिकरणहो रहा है, इसे कैसे सुलझाया जाए? 

संपादक नीरज कुमार दुबे के सवाल पर जवाब देते हुए आईआईएमसी के महानिदेशक ने कहा कि कोई  भी भाषा जब विकास करती है तो उसमें संकट आते हैं। अंग्रेजी लोग अलग तरह से बोलते हैं। उसी तरह हिंदी भी अलग-अलग राज्यों की बोलियों से मिलकर समृद्ध होती है। अंग्रेजी ने अपने अंदर उदारतापूर्वक अन्य चीजों को अपने अंदर समाहित किया। भाषा एक बहती नदी की तरह है। उसको लेकर अड़ने की जरूरत नहीं है। संस्कृत के साथ ऐसा ही हुआ।

पत्रकार के नाते हिंदी में बदलाव को महसूस किया?

महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने कहा कि हिंदी ने अपने आपको समय के साथ ढलना सीखा लिया है। हिंदी में तकनीक के साथ अपने को अपडेट किया है। मोबाइल पर भी सहजता से हम हिंदी में टाइप करते हैं। समय को पहचान कर अपनी तकनीकी दक्षता बढ़ाते हुए सारे प्लेटफॉर्म पर खड़ा करना है।  

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