मार्कफेड के नाम पर बेरोजगारों से रजिस्ट्रेशन फीस वसूल रही मेनपावर एजेंसी, मार्कफेड के अधिकारीयों की भूमिका भी संदिग्ध

भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित यानि मार्कफेड द्वारा 287 भंडारण केन्द्रों में कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर एवं डाटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती के लिए निकाली गई निविदा में एल-1 आयी एजेंसी बेरोजगार आवेदकों से रजिस्ट्रेशन के नाम पर 20 हजार रूपए माँग कर रही है। यह राशि न देने पर आवेदक को नौकरी से वंचित करने की भी एजेंसी द्वारा धमकी दी जा रही है। दरआसल मार्कफेड ने मेनपावर आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाय एजेंसियों से ई-टेंडर के माध्यम से निविदाएं आमंत्रित की थी। जिसमें एसीई मेनपावर ने भी विड डाली थी और एल-1 के रूप में मार्कफेड ने प्राथमिकता देते हुए एसीई मेनपावर एजेंसी को काम दिया गया। लेकिन एजेंस ने टेंडर सेवा शर्तों का उलंघन करते हुए अपने ही नियम बना लिए और बेरोजगार युवक-युवतीयों से 20 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन के नाम पर देने का दबाब बनाया गया। जबकि मार्कफेड द्वारा जारी ई-टेंडर में ऐसी किसी भी रजिस्ट्रेशन फीस लेने का उल्लेख नहीं है। 
 

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पूर्व में मार्कफेड में वर्ल्ड क्लास सर्विस मेनपावर एजेंसी के माध्यम से डाटा एंट्री ऑपरेटरों कार्य कर रहे थे। वही मार्कफेड द्वारा ई-निविदा के माध्यम से मेनपावर उपलब्ध करवाने का ठेका एसीई एजेंसी को मिलने के बाद पूर्व में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों को ही प्राथमिकता के आधार पर रखने की बात कही गई थी। जिससे पहले से अनुभवी कंप्यूटर डाटा एंट्री ऑपरेटर सुचारू रूप से मार्कफेड को सेवाएं दे सके। लेकिन एईसी मेनपावर एजेंसी को ठेका मिलने के बाद उन्होंने मार्कफेड निविदा की शर्तो से अलग अपने ही नियम बना लिए और उन पूर्व में सेवाएं दे रहे कंप्यूटर ऑपरेटरों से 20 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन के नाम पर देने का दबाब बनाया गया तथा यह राशि न देने पर उन्हें सेवा से पृथक करने की भी धमकी दी गई। यही नहीं जिन बेरोजगार कंप्यूटर ऑपरेटरों ने इतनी बड़ी रकम देने से अनभिज्ञता जताई उनसे ऐजेंसी के लोगों ने 5 हजार रूपए की चार किस्तों के रूप में रजिस्ट्रेशन के नाम पर राशि देने का भी प्रस्ताव दिया। जबकि इन कंप्यूटर ऑपरेटरों को मानदेय के रूप में प्रतिमाह 11,810 रूपए ही मिलते है। 
 

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वही इस विषय पर मार्कफेड के प्रबंध संचालक के नाम दिए गए आवेदन में यह जानकारी चाही गई थी कि क्या मेनपावर उपलब्ध करवाने वाली एईसी मेनपावर को मार्कफेड ने रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर 20 हजार रुपए लेने का कोई आदेश निकालकर इसे मंजूरी दी है, क्योंकि ई-निविदा में ऐसे किसी रजिस्ट्रेशन फीस का उल्लेख नहीं है लेकिन मार्कफेड की तरफ इसको लेकर कोई जबाब आज तक नही दिया गया। जबकि एईसी मेनपावर के संचालक से इस विषय में बात की गई तो उन्होंने झल्लाकर यह कहते हुए फोन काट दिया कि आपसे से रजिस्ट्रेशन फीस नहीं मांगी गई। जबकि सूत्रों मिली जानकारी के अनुसार राज्य के सभी जिलों में पूर्व से कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों से पहली किस्त के रूप में 5 हजार रूपए की राशि ऑनलाइन एक्सिस बैंक भोपाल के एक खाते में जमा करवाई गई है। 
 

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जबकि यह राशि जमा ने करने वाले डाटा एंट्री ऑपरेटरों पर दबाब बनाकर उनसे जल्द से जल्द राशि खाते में जमा करने की बात एईसी मेनपावर एजेंसी द्वारा कही जा रही है। सूत्रों की माने तो प्रदेश भर में लगभग 300 डाटा एंट्री ऑपरेटर है जिनसे 20 हजार रूपए की यह राशि रजिस्ट्रेशन के नाम से एईसी मेनपावर एजेंसी वसूल रही है। जो लगभग 60 लाख रूपए होती है बेरोजगार युवक-युवतियों से रजिस्ट्रेशन के नाम पर मार्कफेड का हवाला देकर वसूली जा रही इस राशि को लेकर डाटा एंट्री ऑपरेटरों भी पूर्व में मार्कफेड के अधिकारियों को शिकायत कर चुके है। वही सूत्र बताते है कि मार्कफेड के अधिकारियों और एईसी मेनपावर एजेंसी की मिली भगत के वसूली जा रही राशि पर मार्कफेड की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। जबकि अभी कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसी कंपनी को उपलब्ध करवाना है जिसमें बड़ा भ्रष्ट्राचार होने के भी संकेत मिल रहे है। 

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