महाराष्ट्र विधान परिषद के नामांकन के लिए दिशा निर्देश बनाने संबंधी याचिका खारिज

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र की विधान परिषद के नामांकन के लिए मापदंड तय करने के राज्यपाल को निर्देश देने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया और कहा कि राज्यपाल मंत्री परिषद की सलाह के अनुसार काम करते हैं और अदालतें उनके लिए दिशा निर्देश नहीं बना सकती। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि राज्यपाल द्वारा नामित सदस्यों को हटाने के लिए एक अलग तंत्र है और अदालतें दिशा निर्देश नहीं तय कर सकती कि वे कैसे काम करेंगे और विधान परिषद के सदस्यों को नामित करेंगे।

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पीठ ने कहा, ‘‘राज्यपाल मुख्यमंत्री और मंत्री परिषद की सलाह मानने को बाध्य हैं तथा हम राज्यपालों के लिए दिशा निर्देश नहीं बना सकते कि वे कैसे काम करेंगे।’’ जब वकील ने इस पर जोर दिया तो पीठ ने कहा, ‘‘आप हमसे संविधान में संशोधन चाहते हैं। माफ कीजिए। याचिका खारिज की जाती है।’’

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लातूर के एक स्कूल शिक्षक जगन्नाथ शामराव पाटिल ने विशेष क्षेत्रों से विवेकपूर्ण तरीके से राज्यपाल द्वारा महाराष्ट्र विधान परिषद के नामांकन के लिए नियम बनाने के दिशा निर्देश देने का अनुरोध करते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि विशिष्ट नियम या मापदंड नहीं होने के कारण कई योग्य लोग महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्यों के तौर पर अपने नामांकन के लिए नामों पर विचार से वंचित रह जाते हैं।

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