भाजपा नेता शांता कुमार ने हिमाचल में ड्रिग्री फर्जीवाडे पर सवाल उठाते हुये कहा…जो लोग जेलों में बंद होने चाहिए, वे बाहर खुलेआम घूम रहे हैं

शिमला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने प्रदेश की जय राम ठाकुर के कामकाज पर सवाल उठाते हुये सरकार को कटघरे में ला खडा कर दिया है। उन्होंने कहा  कि  फर्जी डिग्री और फर्जी संस्थान हिमाचल के माथे पर क्लंक का टीका है। यह शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि फर्जी डिग्रियां बिकती रही हैं और कई सालों तक यह सब चलता रहा। लेकिन हिमाचल सरकार को पता ही नहीं चल पाया। जब हम विपक्ष में होते थे तो सीआईडी होटल के नीचे बैठी रहती थी। कौन आ रहा है कौन जा रहा है। लेकिन इस फर्जीवाडे की किसी को भी भनक तक नहीं लगी। 
 
 
 
 
उन्होंने हैरानी जताई कि यह कैसे संभव है कि पुलिस व सरकार को इस मामले की भनक नहीं लग पाई। ऐसा नहीं हो सकता । पैसे के आगे बहुत कुछ बिक जाता है। फर्जी डिग्री की जांच धीरे-धीरे हो रही है। कुछ लोग जेलों में बंद होने चाहिए, वे बाहर  खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि फर्जी डिग्री जांच से संतुष्ट नहीं हूं। यह देश का दुर्भाग्य है कि भ्रष्टाचार होता है। जांच चलती ही रहती है। मेरी प्रदेश के डीजीपी संजय कुंडू से भी बात हुई है। लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। 
 
 
 

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शांता कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति बहुत पहले आ जानी चाहिए थी। इस शिक्षा नीति से बच्चे का सर्वांगीण विकास होगा। पढ़ाई बोझ नहीं बननी चाहिए। नई शिक्षा नीति नया परिवर्तन करेगी।
 
 
 
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी संस्कार विहीन हो रही है। आज हर बच्चे के हाथ में मोबाइल है। नाना-नानी के पास बैठकर रामायण सुनने की बात पुरानी हो गई है। परिवार में जो संस्कार बच्चे को मिलते थे, अब नहीं मिल रहे हैं। संस्कार विहीनता न हो, शिक्षा जगत को काम करना होगा।
 
 
 

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शांता कुमार ने कहा कि अफगानिस्तान में हाल ही में जो घटनाक्रम हुआ है, वह पूरी दुनिया की मानवता का दुर्भाग्य है। अब नशे का प्रकोप और बढ़ेगा। पंजाब तो उड़ता पंजाब बन गया है। हिमाचल उड़ता हिमाचल बन रहा है। गांव-गांव में नशा पहुंच गया है। नशे के कारण हलवाई का काम करने वाला करोड़पति बन गया है। कुछ लोग जो उच्च पदों पर बैठे हैं, उन्हें देश के बजाय चांदी के ठीकरों से प्यार है।  
 
 

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शांता कुमार ने कहा कि सही इतिहास की जानकारी मिलनी चाहिए। सैकेंडरी स्तर पर अंक रख दिए गए हैं। लोकल इतिहास पढऩा पड़ेगा। हिमाचली भाषा पर सवाल के जवाब में शांता ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि हिमाचल की भाषा कौन-सी है। हिमाचल में कई भाषाएं बोली जाती हैं। हिमाचल में कामकाज की भाषा हिंदी होनी चाहिए।

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