क्या पेगासस जैसे स्पाईवेयर से डिवाइस को रखा जा सकता है सुरक्षित ? बचाव के लिए इन टूल्स का करें इस्तेमाल

नयी दिल्ली। पेगासस जासूसी मामले को लेकर भारत की सियासत गर्मायी हुई है। विपक्ष लगातार उच्चतम न्यायालय की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग कर रहा है। इसी बीच लोगों के ज़हन में एक सवाल बार-बार खड़ा हो रहा है कि क्या इस जासूसी सॉफ्टवेयर से बचा जा सकता है ? जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बचने का कोई तरीका नहीं है। तो हम आपको बता दें कि हर किसी का तोड़ मौजूद रहता है। बस आपको थोड़ा सतर्क होने की जरूरत है। 

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एक हिन्दी समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली जासूसी सॉफ्टवेयर ‘पेगासस’ और इसी तरह के दूसरे सॉफ्टवेयर से बचने में कुछ टूल्स आपकी मदद कर सकते हैं।

बिटवॉर्डन

बिटवॉर्डन एक तरह का लॉकर है। जहां पर आप अपनी फाइलों को पूरी तरह से सुरक्षित और गोपनीय रख सकते हैं। दरअसल, मोबाइल फोन में मौजूद कई सारे एप में एक्सेस करने के लिए अकाउंट बनाने की जरूरत होती है। ऐसे में किसी एक व्यक्ति के अलग-अलग अकाउंट के अलग-अलग पासवर्ड हो सकते हैं। जिन्हें याद रखने में मुश्किल होती है। ऐसे में यूजर्स बहुत ही साधारण सा पासवर्ड बनाते हैं। जिन्हें याद रखा जा सके। कुछ लोग तो 12345678 जैसे न्यूमेरिक नंबर का भी इस्तेमाल करते हैं। या फिर पासवर्ड को याद रखने के लिए वो उसे अपने मेल या फिर मोबाइल के नोट पर लिखकर सेव कर लेते हैं। जिसकी वजह से सेंधमारी का खतरा बना रहता है।

ऐसे में यूजर बिटवॉर्डन में अपना अकाउंट बनाकर अपनी फाइल को सुरक्षित कर सकता है। इसके लिए आपको महज एक ही पासवर्ड याद रखने की जरूरत होती है और याद रखे गए पासवर्ड पर स्पाईवेयर सेंधमारी नहीं कर पाएगा। इसमें आपका डाटा पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। हालांकि कई मौकों पर बिटवॉर्डन में भी सेंधमारी करने का प्रयास किया जा चुका है लेकिन उसमें मौजूद लॉकर पूरी तरह से सुरक्षित है। 

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यूबीकी

यूबीकी एक तरह की डिवाइस है, जो बिल्कुल पेनड्राइव की तरह दिखती है। इसकी मदद से भी स्पाईवेयर से बचा जा सकता है। दरअसल, यूबीकी को मोबाइल फोन या फिर लैपटॉप से कनेक्ट कर सेटअप कर लीजिए। सेटअप करने के लिए yubico.com नामक वेबसाइट खुल जाएगी। जहां पर आसानी से यूजर्स इसे सेटअप कर सकते हैं। इसके साथ ही वहां पर आपको यूबीकी को सपोर्ट करने वाले ऐप्स की लिस्ट भी मिल जाएगी। सेटअप पूरा होने पर ऐप्स को कोई भी आसानी से नहीं खोल पाएगा। इसके लिए डिवाइस से यूबीकी का कनेक्ट होना जरूरी है।

गूगल ऑथेंटिकेटर

गूगल ऑथेंटिकेटर गूगल के ऐप्स और कई सारे थर्ड पार्टी ऐप्स को सपोर्ट करता है। दरअसल यह टू स्पेस वैरिफिकेशन प्रोसेस है। आपको सबसे पहले इसे अपने डिवाइस पर डाउनलोड करना होगा और फिर एक-एक करके सभी ऐप्स को इससे लिंक करना पड़ेगा। इसके बाद आप जब कभी ऐप्स को खोलेंगे तो गूगल ऑथेंटिकेटर में पासवर्ड आएगा। जिसे डालने के बाद ही ऐप ओपन होंगे। ऐसे में स्पाईवेयर आपके ऐप्स में सेंधमारी नहीं कर पाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अपने डिवाइसेस (मोबाइल फोन, लैपटॉप इत्यादि) को एंटीवायरस से लैस रखना चाहिए। लेकिन कई बार देखा गया है कि यूजर्स फ्री एंटीवायरस का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन हम आपको बता दें कि मैकेफी, नार्टन, क्विकहील के फुल फीचर वाले एंटीवायरस को ही अपने डिवाइस पर इनस्टॉल करना चाहिए। ताकि डिवाइस पूरी तरह से सुरक्षित हो सके। 

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गौरतलब है कि विदेशी मीडिया ने रविवार को दावा किया कि केवल सरकारी एजेंसियों को ही बेचे जाने वाले इजराइल के जासूसी साफ्टवेयर के जरिए भारत के दो केन्द्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, राहुल गांधी समेत 3 विपक्षी नेताओं और एक न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और अधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर हो सकता है कि हैक किए गए हों।

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