एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट क्या है, सुपरटेक के ट्विन टॉवर को SC ने गिराने का आदेश क्यों दिया?

नोएडा में सुपरटेक बिल्डर की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट का चाबुक चला है। सुपरटेक ने नियमों की अनदेखी करते हुए 40 मंजिला के दो टॉवर खड़े कर दिए। इन टॉवरों को सुप्रीम कोर्ट ने गिराने का आदेश दे दिया। इस फैसले में खरीदारों के लिए राहत की बात है। कोर्ट ने सुपरटेक को दो महीने के भीतर 12 फीसदी ब्याज के साथ ये पैसा खरीदारों को लौटाने का आदेश दिया है। 

एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट क्या है?

नवंबर 2004 में नोएडा ने एक ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी – एमराल्ड कोर्ट के विकास के लिए सेक्टर 93 ए में सुपरटेक को जमीन का एक भूखंड आवंटित किया था। जून 2005 में न्यू ओखला औद्योगिक विकास क्षेत्र भवन विनियम और निर्देश, 1986 के तहत चौदह टावरों के निर्माण के लिए भवन योजना को मंजूरी दी गई थी। जून 2006 में, उसी जमीन के भूखंड में एक अतिरिक्त भूमि क्षेत्र सुपरटेक को उन्हीं शर्तों के तहत पट्टे पर दिया गया था। चूंकि नए नियम, न्यू ओखला औद्योगिक विकास क्षेत्र भवन विनियम और निर्देश 2006, दिसंबर 2006 में अधिसूचित किए गए थे, परियोजना के लिए एक संशोधित योजना को मंजूरी दी गई थी और टावरों के लिए दो अतिरिक्त मंजिलों, दो और टावरों और एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को मंजूरी दी गई थी। अधिकारियों ने कुल 16 टावरों और एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की अनुमति दी। अप्रैल 2008 में, आठ टावरों को पूरा किया गया और सितंबर 2009 तक, कुल 14 टावरों को पूरा किया गया।

इसे भी पढ़ें: Supertech Emerald Case: सुप्रीम कोर्ट के बाद सीएम योगी भी सख्‍त, दोषी अफसरों पर सख्त कार्रवाई के दिए आदेश

दो नए टावरों का क्या हुआ?

पहली संशोधित योजना में टावर 1 के सामने हरित क्षेत्र पर विचार किया गया था लेकिन सुपरटेक ने जुलाई 2009 में वहां नए टावरों का निर्माण शुरू किया और वह भी अधिकारियों से मंजूरी मिलने से पहले। नवंबर 2009 में, नोएडा के अधिकारियों ने एक दूसरी संशोधित योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत 2006 में स्वीकृत नए टावरों में से एक को 12 मंजिलों के स्थान पर 25 मंजिलों की अनुमति दी गई थी और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, जिसमें दो मंजिलें थीं, को बदल दिया गया था। टावरों की 73 मीटर की ऊंचाई की योजना बनाई गई थी। परियोजना के कुल टावर अब बढ़कर 17 हो गए। 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या है ?

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में नियमों का उल्लंघन कर एमेराल्ड कोर्ट परियोजना में बनाए गए सुपरटेक के 40 मंजिला दो निर्माणाधीन टॉवरों को मंगलवार को तीन महीने के भीतर गिराने का निर्देश दिया और कहा कि मामले में जिले के अधिकारियों की ‘‘मिलीभगत’’ साफ नजर आती है तथा कानून का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अवैध निर्माण से सख्ती से निपटे जाने की आवश्यकता है। नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा)के अधिकारियों की खिंचाई करते हुए न्यायालय ने इसके अधिकारियों की एमेराल्ड कोर्ट परियोजना में सुपरटेक के साथ मिलीभगत की कई घटनाओं को रेखांकित किया। शीर्ष अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि घर खरीददारों का समूचा धन बुकिंग की तारीख से 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाया जाए और दोनों टॉवरों की वजह से एमेराल्ड कोर्ट की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को हुई परेशानी के लिए दो करोड़ रुपये दिए जाएं। आरडब्ल्यूए ने नोएडा के सेक्टर 93 ए स्थित संबंधित टॉवरों के खिलाफ कानूनी लड़ाई की शुरुआत करते हुए कहा था कि इनकी वजह से धूप और ताजी हवा रुक गई है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने टॉवरों को गिराने से संबंधित इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 11 अप्रैल 2014 के आदेश को बरकरार रखते हुए 140 पन्नों के अपने फैसले में कहा, ‘‘इस मामले का रिकॉर्ड नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की, अपीलकर्ता तथा इसके प्रबंधन के साथ मिलीभगत के उदाहरणों से भरा है।’’  

Source Link

Share:
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply