एग्जाम सेंटर में शार्ट्स पहनकर पहुंची छात्रा को रोका, पर्दा लपेट कर देना पड़ा परीक्षा; जानें पूरा मामला

असम में एक 19 वर्षीय छात्रा को एग्जाम देने से मना कर दिया गया क्योंकि वह शॉर्ट्स पहनकर परीक्षा देने पहुंची थी। जोरहाट के असम कृषि विश्वविद्यालय (Assam Agricultural University) की प्रवेश परीक्षा देने पहुंची 19 वर्षीय जुबली तमुली को अपने चारों तरफ पर्दा लपेट कर रहना पड़ा। अग्रेंजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक, जुबली अपने पिता के साथ बिश्वनाथ चरियाली से 70 किमी की दूरी तय कर  तेजपुर शहर पहुंची थी। जब वह एग्जाम सेंटर गिरिजानंद चौधरी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज में पहुंची तो एंट्री के वक्त उसे किसी ने नहीं रोका लेकिन जैसे ही वह परीक्षा हॉल में पहुंची तो हंगामा शुरू हो गया। 

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‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को घटना के बारे में बताते हुए जुबली ने फोन पर कहा कि, उसे परीक्षा हॉल में जाने से सुरक्षा गार्डों ने नहीं रोका लेकिन परीक्षा हॉल में निरीक्षक ने जुबली को शॉर्ट्स में देखते ही बैठने से मना कर दिया। जुबली के मुताबिक, एडमिट कार्ड में कोई भी ड्रेस कोड को लेकर जिक्र नहीं किया गया था। इससे पहले भी जुबली ने नीट का एग्जाम उसी शहर में ठीक उसी पोशाक में बैठ कर दिया था और उसे वहां किसी ने नहीं रोका था। कपड़े के नियमों को लेकर न ही एडमिट कार्ड में कुछ लिखा हुआ था और न ही AAU के पास कोई जानकारी थी। बता दें कि जब जुबली को एग्जाम में बैठने से मना किया तो वह भागते हुए अपने पिता के पास पहुंची और सारी घटना का जिक्र किया। इस बीच परीक्षा नियंत्रक ने जुबली के पिता से नए पैंट मंगवाने को कहा ताकि उनकी बेटी परीक्षा दे सके। पिता एक जोड़ी पैंट लाने के लिए बाजार भागे वहीं जुबली अपनी कीमती समय खोती जा रही थी। इस दौरान वह काफी परेशान भी हुई। 8 किमी की दुरी तय कर जुबली के पिता  बाबुल तमुली एक पैंट लेकर पहुंचे।

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जुबली ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे अपमानजनक अनुभव बताया और कहा कि, अगर मेरे पास बुनियादी सामान्य ज्ञान की कमी है, तो मैं जीवन में कैसे सफल होऊंगी, यह “पूरी तरह से अनुचित” था। जुबली ने बताया कि, एग्जाम सेंटर में न तो मास्क की जांच की और न ही तापमान की लेकिन उन्होंने शॉर्ट्स की जांच की।बता दें कि जुबली अपने साथ हुए इस अनुभव के बारे में असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगु को पत्र लिखेगी। इस मामले को लेकर जीआईपीएस के प्राचार्य डॉ अब्दुल बकी अहमद ने बताया कि, इस घटना के दौरान वह कॉलेज में मौजूद नहीं थे। उन्होंने आगे कहा कि, शॉर्ट्स के बारे में कोई नियम नहीं है लेकिन परीक्षा के दौरान एक डेकोरम बनाए रखना बहुत जरूरी होता है और इसको लेकर खुद माता-पिता को पता ही रहना चाहिए।

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