CIA समर्थित इतिहास का सबसे खौफनाक 9/11, जब प्रेसिडेंट हाउस पर गिराए गए 17 बम और राष्ट्रपति ने खुद को ही मार ली गोली

11 सितंबर 2001 की वो स्याह तारीख को भला कौन भूल सकता है। जब 20 साल पहले आतंकियों ने इसी दिन सुपर पॉवर मुल्क कहे जाने वाले अमेरिका की बुनियाद हिला कर रख दी थी। उस दिन आतंकवादियों ने अमेरिका का गुरूर कहे जाने वाली इमारत का वजूद ही खत्म कर दिया था। लेकिन आज हम बात अमेरिका में हुए हमले की नहीं करेंगे बल्कि आपको ऐसी कहानी सुनाएंगे जब एक देश के राष्ट्रपति भवन पर रॉकेट और बमों से हमला किया गया था। दक्षिण अमेरिकी में एंडिज पर्वत और प्रशांत महासागर के बीच स्थित देश चिली,  जिसके उत्तर में पेरु, उत्तर-पूर्व में बोलीविया, पूर्व में अर्जेन्टीना और दक्षिण छोर पर ड्रेक पैसेज स्थित है। 

जब चिली के सशस्त्र बलों ने जनरल ऑगस्टो पिनोशे की कमान में सल्वाडोर ऑलंडे की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई मार्क्सवादी सरकार को हटा दिया और सीआईए और अमेरिकी के पूर्ण समर्थन के साथ निर्ममता और क्रूरतम घटनाओं को अंजाम देते हुए सत्ता हथिया ली। इस कहानी की शुरुआत होती है साल 1970 में सल्वाडोर ऑलंडे की सरकार लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई थी। ऑलंडे एक मार्क्सवादी थे और उन्होंने ही चिली की सोशलिस्ट पार्टी की सह-स्थापना की थी ।”पॉपुलर यूनिटी” (पक्टो डे ला यूनिदाद पॉपुला) के रूप में जाने जाने वाले वामपंथी गठबंधन में चुनाव जीता था। यह लैटिन अमेरिका में पहली लोकप्रिय रूप से चुनी गई समाजवादी सरकार थी और इसे व्यापक जन समर्थन प्राप्त था। ऑलंडे लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार में सुधार करने के लिए निकल पड़े। उनके सुधार कार्यक्रम में खनन उद्योग का राष्ट्रीयकरण भी शामिल था। लेकिन सेना सहित स्थापित सत्ता संरचनाओं के मजबूत विरोध का सामना करना पड़ा। सल्वाडोर ऑलंडे ने जो सुधार किए उनसे महँगाई बढ़ी और खाद्यान्न की कमी हो गई। इसके बाद लगातार हुई हड़तालों ने देश की अर्थव्यवस्था को चरमरा दिया। सैन्य विद्रोह से पहले राजधानी में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

ऑलंडे सरकार को सत्ता से हटाने का अमेरिकी प्लान

निक्सन ने सीआईए को ऑलंडे सरकार को सत्ता से हटाने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ देश में गुप्त अभियान चलाने का भी आदेश दिया। चिली की सेना को तख्तापलट शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए अमेरिका ने एक “तख्तापलट का माहौल” (दस्तावेजों में अक्सर दोहराया जाने वाला वाक्यांश) बनाया। इसने जनरल ऑगस्टो पिनोशे को खुद को राष्ट्रपति घोषित करने और अगले 17 वर्षों के लिए लोकतंत्र को समाप्त करने में सक्षम बनाया। बाद में ये भी बात सामने आई की सीआईए को ऑस्ट्रेलिया से मदद मिली थी। सार्वजनिक किए गए ऑस्ट्रेलियाई रिकॉर्ड के अनुसार सीआईए के इशारे पर ऑस्ट्रेलियाई गुप्त खुफिया सेवा (एएसआईएस) ने 1971 में सैंटियागो में एक “स्टेशन” की स्थापना की और चिली में अमेरिकी हस्तक्षेप का सीधे समर्थन करने के लिए जासूसी अभियान चलाया। 

ऑस्ट्रेलिया की एजेंसी ने की सीआईए की मदद 

एएसआईएस के अधिकारियों ने चिली की राजधानी में गुप्त रूप से एक स्टेशन खोलने के लिए दिसंबर 1970 में लिबरल पार्टी के विदेश मंत्री विलियम मैकमोहन से एप्रुवल प्राप्त किया। 1971 के गर्मियों में एएसआईएस के अधिकारियों ने स्टेशन को व्यवस्थित करने के लिए एजेंटों और उपकरणों को चिली भेजा। M09 – एएसआईएस द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला कोडनेम था। एएसआईएस ने अमेरिका को “आर्थिक युद्ध,” “राजनीतिक युद्ध” और “मनोवैज्ञानिक युद्ध” में शामिल होने में मदद की। लेकिन 1973 में लेबर पार्टी के नए प्रधानमंत्री, गॉफ व्हिटलैम ने एएसआईएस के निदेशक को चिली के संचालन को बंद करने का आदेश दिया।  उन्हें एएसआईएस की गतिविधिया का शक हो गया था जिसका जिक्र संसद में करते हुए व्हिटलैम ने कहा भी था कि चिली की सरकार को अस्थिर करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई खुफ़िया कर्मचारी अभी भी सीआईए के परदे के पीछे और नामितों के रूप में काम कर रहे थे।

सीआईए के समर्थन में सैन्य तख्तापलट

अगस्त 1973 में सल्वाडोर ऑलंडे तख्तापलट की कोशिशों को रोकने के लिए सेना के कुछ वरिष्ठ अफसरों को सरकार में लेकर आए। ठीक इसी वक्त जनरल ऑगस्टो पिनोशे को सेना के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। चिली की दोनों प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग की। इस्तीफे की शुरुआती मांगों को राष्ट्रपति की ओर से खारिज कर दिए जाने के बाद वायुसेना के जहाजों ने राष्ट्रपति भवन पर रॉकेट और बमों से हमला कर दिया। बताया जाता है कि हमले में टैंकों का भी इस्तेमाल किया गया। राष्ट्रपति भवन पर किए गए हमले के दौरान कम से कम 17 बम गिराए गए थे। आधिकारिक ब्यौरों के मुताबिक सल्वाडोर ने राष्ट्रपति भवन पर सैनिकों के धावा बोलते ही खुद को गोली मार ली थी। जिसके बाद सैन्य तख्तापलट करते हुए चिली के सेना प्रमुख जनरल ऑगस्टो पिनोशे ने खुद को देश का नया राष्ट्रपति घोषित कर दिया। सीआईए समर्थित इस इस विद्रोह में हजारों लोगों की मौत हुई। जनरल पिनोशे ने 17 साल तक शासन किया। उनके कार्यकाल में 3 हज़ार से ज्यादा राजनीतिक विरोधी मारे गए या सेना के द्वारा गायब कर दिए गए। 

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