मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री रामगुलाम को AIIMS में मिली नई जिंदगी, कहा- कोविड में खुद न करें उपचार

मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम की अचानक तबीयत बिगड़ी जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए भारत लाया गया। बता दें कि, 73 साल के रामगुलाम को हाल ही में कोरोना संक्रमण हुआ था जिससे वह उबर भी गए थे लेकिन कोरोना के बाद उन्हें कई परेशानियों से जूझना पड़ रहा था जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए भारत लाया गया।
तबीयत ठीक होने के बाद नवीनचंद्र रामगुलाम ने गुरुवार को अग्रेंजी अखबार TOI से एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि, अगर मैं आज जीवित हूं, तो यह एम्स और भारत सरकार के डॉक्टरों और नर्सों की वजह से है, एक डॉक्टर होने के बावजूद, रामगुलाम ने कहा कि उन्होंने गलती की है कि उन्होंने हमेशा दूसरों को आगाह किया कि कोरोना का इलाज पहले खुद से करें। उन्होंने खुलासा किया कि, जब मुझे कोविड -19 के लक्षण दिखने शुरू हुए, तो मैं तुरंत अस्पताल नहीं गया और मैंने खुद का इलाज किया। इससे जटिलताएं पैदा हुईं। बता दें कि मॉरीशस अस्पताल के डॉक्टरों ने खुद पूर्व प्रधानमंत्री को बेहतर इलाज के लिए यूके या भारत जाने की सलाह दी जिसमें से उन्होंने भारत को चुना।
9 सितंबर को आए थे दिल्ली
74 वर्षीय रामगुलाम को 9 सितंबर को दिल्ली लाया गया और भारत सरकार की सलाह के अनुसार एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। भर्ती के समय उनकी स्थिति गंभीर थी क्योंकि उनके फेफड़ों में गंभीर समस्या शुरू हुई थी और उच्च स्तर पर ऑक्सीजन देने की जरूरत थी।पूर्व पीएम अब बीमारी से उबरने के बाद अपने देश लौटने के लिए तैयार हैं।रामगुलाम ने कहा कि, कोविड के लक्षण विकसित होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और वैक्सीन जरूर कराएं। ऐसे कई लोग हैं जो टीकाकरण नहीं करवा रहे है लेकिन यह काफी महत्वपूर्ण है खासकर वृद्ध लोगों के लिए। बता दें कि नेता को पूरी तरह से टीका नहीं लगाया गया था।
मॉरीशस में 100 से पार कोरोना मरीजों की मौत
मॉरीशस में, स्थानीय सरकार का दावा है कि महामारी शुरू होने के बाद से कोविड से लगभग 100 लोग मारे गए हैं। कोरोना को नियमों पालन करने के साथ ही रामगुलाम ने कहा कि, हमें सामाजिक दूरी बनाए रखनी होगी, मास्क पहनना होगा और स्वच्छता के उपायों का पालन करना होगा।
1995 से 2000 देश के प्रधानमंत्री के रूप में किया काम
मॉरीशस के प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम ने 1995 से 2000 तक अपने देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उन्हें 2005 में फिर से प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया। उन्होंने कहा कि दूसरी कोविड लहर से पहले, कई लोग सावधानियों का पालन नहीं कर रहे है और  त्योहारों में भाग ले रहे है जिससे संक्रमण के तेजी से फैलने का खतरा बढ़ रहा है। बता दें कि,पूर्व पीएम का भारत से पुराना नाता है। कहा जाता है कि उनके पूर्वज बिहार के रहने वाले थे। 2008 में, रामगुलाम ने राज्य का दौरा भी किया था।

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