श्रीलंका ने आतंकवाद रोधी कानून की समीक्षा के लिए उठाए कदम की जानकारी ईयू को दी

कोलंबो। श्रीलंका ने तमिलों के साथ सुलह-सफाई प्रक्रिया में हुई प्रगति और आतंकवाद निरोधक कानून की समीक्षा के लिए चल रही कोशिश से यूरोपीय संघ (ईयू) को अवगत कराया है। श्रीलंका का आतंकवाद रोधी कानून पुलिस को संदिग्धों को बिना मुकदमे गिरफ्तार करने की ताकत देता है। श्रीलंका ने यह जानकारी 27 सदस्यीय समूह की इस चेतावनी के बाद दी है जिसमें कहा गया कि मानवाधिकार उल्लंघन की चिंताओं के मद्देनजर कोलंबो को निर्यात में दी जा रही रियायत समाप्त की जा सकती है

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विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि श्रीलंका की सरकार ने ईयू को सुलह-सफाई प्रक्रिया के विशेष क्षेत्र में हुई प्रगति की जानकारी, संगठन के साथ नियमित संपर्क और संवाद के तहत दी है। यूरोपीय संसद ने 10 जून को एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें श्रीलंका के आतंकवाद निरोधक कानून (पीटीए) को रद्द करने और अस्थायी रूप से ‘जीएसपी प्लस’ दर्जा वापस लेने पर विचार करने की मांग की गई थी। ईयू के ‘जीएसपी प्लस’ दर्जे के तहत श्रीलंका को बिना कर यूरोप में निर्यात करने की सुविधा मिलती है। इससे श्रीलंका के वस्त्र और मत्स्य उद्योग को बढ़ावा मिलता है।

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श्रीलंका का यह दर्जा वर्ष 2010 में मानवाधिकार और श्रम अधिकारों के कथित उल्लंघन के कारण स्थगित कर दिया गया था लेकिन वर्ष 2017 में फिर से इसे बहाल किया गया। यूरोपीय संसद में पारित प्रस्ताव में रेखांकित किया गया कि श्रीलंका को ‘जीएसपी प्लस’ दर्जा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों के तहत नियमों को लागू करने की शर्त पर दिया गया था जो उसे द्विपीय देश में लिब्रेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के साथ चले 30 साल के गृह युद्ध की समाप्ति के बाद करना है।

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