परमाणु ताकत बढ़ाने में जुटा ड्रैगन ! बैलिस्टिक मिसाइल के लिए 100 साइलो का कर रहा निर्माण

बीजिंग। दुनिया पर अपना प्रभुत्व जमाने का ख्याब देखने वाला चीन तेजी से अपनी सैन्य क्षमताओं में इजाफा कर रहा है। हाल ही में एक सैटेलाइट तस्वीर सामने आई है। जिससे पता चलता है कि चीन युमेन के पास एक रेगिस्तान में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए 100 से अधिक नए साइलो का निर्माण कर रहा है। इस खबर ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। 

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चीन मिसाइलों का करेगा परीक्षण !

युमेन की ताजा तस्वीर आने के बाद चिंता जताई जाने लगी कि चीन आने वाले समय में खतरनाक मिसाइलों का परीक्षण कर सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि साइलो एक तरह के स्टोरेज कंटेनर होते हैं, जिनके भीतर लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलों को रखा जाता है।

क्या है इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल ?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल लंबी दूरी की मारक क्षमता रखती है। जिसका मतलब है कि यह मिसाइल एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप के निशाने को नेस्तानाबूत कर सकती है। इतना ही नहीं लॉन्चिंग साइट से निकलने के बाद मिसाइल अंतरिक्ष के निशाने को भी तबाह कर सकती है। 

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चीन के पास अमेरिका तक मारक क्षमता रखने वाली DF-5 और DF-41 मिसाइलें हैं। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में दुश्मनों पर हावी होने के लिए चीन मिसाइलों का मुख्यतौर पर इस्तेमाल कर सकती है। इसीलिए वह लगातार अपनी ताकतों को बढ़ाने में जुटा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने स्वीकार किया कि उनके पास अभी हवा में चीनी मिसाइलों को मार गिराने के लिए पर्याप्त हवाई सुरक्षा नहीं है।

माना जा रहा है कि चीन लगातार परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। अभी उसके पास 250 से 350 तक परमाणु हथियार है। ऐसे में वह और भी ज्यादा साइलों का निर्माण कर सकता है।

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