निर्वासित तिब्बती सरकार ने चीन से कहा, बातचीत के दरवाजे खोले

धर्मशाला। निर्वासित तिब्बत सरकार चीन से जल्द ही वार्ता का दौर शुरू करने की कोशिशें में जुटी है ताकि तिब्बत समस्या का स्थायी समाधान हो व दलाई लामा को तिब्बत जाने की अनुमति मिले।  अमेरिका भी चाहता है कि बातचीत का दौर एक बार फिर शुरू हो। वहीं भारत की निति में बदलाव देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासित तिब्बत सरकार के मुख्यालय में इन दिनों खासी गहमागहमी है। दलाई लामा भले ही इन दिनों किसी से नहीं मिल रहे हों लेकिन बदलते घटनाक्रम पर उनकी नजर है। हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की यात्रा कर चुके हैं तो अब केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने चीनी राष्ट्रपति से तिब्बती प्रतिनिधियों और चीनी सरकार के बीच बातचीत फिर से शुरू करने को कहा है। पिछले दिनों तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) की शी की यात्रा 2013 में चीनी राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने के बाद उनकी पहली यात्रा है।
 

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निर्वासित तिब्बत सरकार के अतिरिक्त सचिव व प्रवक्ता तेनजिन लेक्षय ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बड़े धूमधाम से ल्हासा और निंगत्री का दौरा किया है। मुझे लगता है कि राष्ट्रपति के रूप में यह उनकी पहली तिब्बत यात्रा है। वह मानते हैं कि इस यात्रा के साथ, उन्हें तिब्बत की वास्तविक आकांक्षाओं को समझना चाहिए और विचार करना चाहिए कि तिब्बत मुद्दा एक लंबे समय से लंबित मुद्दा है, जो अभी भी अनसुलझा है। उन्हें तिब्बती प्रतिनिधियों और चीनी सरकार के बीच बातचीत को फिर से शुरू करना चाहिए। ताकि दोनों पक्ष समस्या के समाधान की ओर आगे बढें। साठ से अधिक साल पहले, लगभग 80 हजार तिब्बती, अपने आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के साथ, तिब्बत पर कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ एक असफल विद्रोह के बाद ल्हासा छोड़ कर भारत आ गए थे। तिब्बती निर्वासन प्रशासन, जिसे सीटीए  केन्द्रिय तिब्बती प्रशासन कहा जाता है, हिमाचल के धर्मशाला में स्थित है, जहां तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा भी रहते हैं। तिब्बत मुद्दे को सुलझाने के लिए चीन और दलाई लामा के दूतों ने 2002 से नौ दौर की बातचीत हो चुकी है। जनवरी 2010 में बीजिंग में आयोजित अंतिम दौर की वार्ता (नौवीं) में सीटीए ने तिब्बती लोगों के लिए वास्तविक स्वायत्तता पर अपने रुख को स्पष्ट करने के लिए चीनी नेतृत्व को एक व्याख्यात्मक नोट प्रस्तुत किया था। उस दौर के समापन पर, चीनी पक्ष ने जो बयान जारी किया, उसमें कहा गया कि दोनों पक्षों के हमेशा की तरह तेजी से विभाजित विचार हैं।
 

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सीटीए मध्यमार्ग दृष्टिकोण में विश्वास करता है, जिसका अर्थ तिब्बत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता के बजाय अधिक स्वायत्तता है। कहा जा रहा है कि पिछले दिनों तिब्बत की राजधानी ल्हासा आने से पहले  चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्र निंगत्री का भी दौरा किया था। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो क्लिप में शी पोटाला पैलेस के सामने सड़क पर लोगों से बात करते नजर आ रहे हैं। शी के साथ टीएआर के पार्टी सचिव वू यिंगजी और टीएआर के अध्यक्ष चे दल्हा और अन्य अधिकारी दिखाई दिए। कई लोग मानते हैं कि यह यात्रा विवादास्पद 17 सूत्री समझौते की 70वीं वर्षगांठ से जुड़ी है, जिस पर तिब्बतियों को 1951 में चीनी सरकार के दबाव में हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था। ल्हासा की उनकी अंतिम यात्रा 2011 में समझौते की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई थी, जब शी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के उपराष्ट्रपति थे। शी 1998 में फुजियान प्रांत के पार्टी सचिव के रूप में तिब्बत का दौरा भी कर चुके हैं।

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