क्यों चीन से रिश्ते बेहतर करना चाहता है अमेरिका, मेल-मिलाप की कोशिशों से होगा संबंधों में सुधार?

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस साल के अंत में मुलाकात होनी है। लेकिन ये मुलाकात आमने सामने बैठकर नहीं होगी। शी और बाइडेन की मीटिंग वर्चुअल होगी। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक ऐसे समय में होने जा रही है जब व्यापार, मानवाधिकार, दक्षिणी चीन सागर और ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। 

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी सदस्य की हुई मुलाकात

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य और विदेश मामलों संबंधी आयोग के कार्यालय के निदेशक यांग जिएची के बीच ज्यूरिख में करीब छह घंटे तक चली बैठक के बाद व्हाइट हाउस ने यह घोषणा की। पिछले साल अलास्का के बाद पहली बार अमेरिका और चीन के राजनयिकों के बीच ऐसी बातचीत हुई है। इस बातचीत को एयरपोर्ट के पास बने एक होटल में अंजाम दिया गया। 

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फोन कॉल वाली वार्ता के बाद बनी बात

अमेरिका का कहना है कि ये बैठक 9 सितंबर को बाइडेन और जिनपिंग के फोन कॉल में हुई बातचीत का नतीजा है। जिसमें दोनों देशों ने ये फैसला किया कि एक बार एक-दूसरे को समझने का मौका दिया जाए। कोशिश ये कि जा रही है कि दोनों देश एक दूसरे के व्यवहार और कदम को गलत तरीके से न समझे ताकि युद्ध जैसी नौबत न बन जाए। बता दें कि सितंबर के महीने में ही बाइडेन ने सात महीने के बाद पहली बार चीनी समकक्ष के साथ बात की है।  दोनों के बीच की ये वार्ता 90 मिनट तक चली है। इसमें अमेरिका और चीन के रिश्ते को किस तरह आगे बढ़ाया जाए इसको लेकर चर्चा हुई। चीनी मीडिया की ओर से कहा गया कि शी और बाइडेन की बातचीत खुले दिन से हुई है। जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका की उनके प्रति नीति से चीन के साथ रिश्‍तों में बड़ी बाधा आ रही है। चीनी पक्ष ने कहा कि दोनों नेताओं ने भविष्‍य में अक्‍सर संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।

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ड्रैगन और यूएस के बीच कम होगा तनाव?

चीन और अमेरिका के बीच तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिका चीन की ताइवान नीति से बहुत नाराज है। ताइवान के रक्षा मंत्री खुद कह रहे हैं कि चीन 2025 तक ताइवान पर हमला कर सकता है। जबकि चीन कह रहा है के उसके एक्साइजेज्स को युद्धाभ्यास के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। व्हाइट हाउस ने दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बैठक की घोषणा ऐसे समय में की है जब अमेरिकी राष्ट्रीपति जो बाइडन नीत प्रशासन ने बीजिंग से ताइवान पर सैन्य दबाव डालने की कोशिशों को खत्म करने और व्यापार से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का पालन करने की मांग की।  व्‍हाइट हाउस के प्रवक्‍ता जेन प्‍साकी ने बताया है कि फिलहाल इस सम्‍मेलन को लेकर काम किया जा रहा है। इससे अधिक की जानकारी फिलहाल नहीं दी जा सकती है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक बाइडन की इच्छा यह थी कि शी जिनपिंग रोम में होने वाली जी-20 देशों की बैठक में आएं और वहां दोनों राष्ट्रपतियों के बीच आमने-सामने बातचीत हो। लेकिन चीनी राजनयिकों ने जी-20 अधिकारियों को सूचित कर दिया है कि शी रोम नहीं जाएंगे। इसे देखते हुए अब तय हुआ है कि दोनों राष्ट्रपति वर्चुअल माध्यम से सीधी बातचीत करेंगे। आपको बता दें कि चीन के राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग पिछले वर्ष जनवरी में कोरोना महामारी के बाद से देश के बाहर नहीं गए हैं।

 अमेरिका और चीन के संबंधों का इतिहास

चीन और अमेरिका के बीच रिश्तों की शुरुआत 1970 में पाकिस्तान के जरिए शुरू हुई। इसे ‘पिंग-पॉन्ग डिप्लोमेसी’ भी कहा जाता है। इसमें अमेरिका की टेबल-टेनिस टीम चीन गई थी। इसके बाद 1972 में राष्ट्रपति निक्सन चीन की आठ दिनों की यात्रा पर गए। इसके सात साल बाद दोनों देशों के बीच पूरी तरह से कूटनीतिक संबंध स्थापित हो गए। अमेरिकी डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने 636 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापारिक समझौता चीन के साथ किया। यह पूरी तरह से चीन के पक्ष में झुका हुआ था। 

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